Class 12th Hindi ‘Tirichh’ Chapter Subjective Question | कक्षा 12 हिन्दी ‘तिरिछ’ चैप्टर का महत्वपूर्ण प्रशन

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Class 12th Hindi ‘Tirichh’ Chapter Subjective Question | कक्षा 12 हिन्दी ‘तिरिछ’ चैप्टर का महत्वपूर्ण प्रशन


प्रश्न 1. लेखक के पिता के चरित्र का वर्णन अपने शब्दों में करें। 

उत्तर – लेखक के पिताजी ‘तिरिछ’ कहानी के प्रमुख पात्र हैं । संपूर्ण कहानी उन्हीं के इर्द-गिर्द घूमती है। कहानी में उन्हीं के साथ घटी घटनाओं का मार्मिक चित्रण प्रस्तुत किया गया है। 

लेखक के पिता एक सीधे-सादे अंतर्मुखी तथा ग्रामीण संवेदना वाले व्यक्ति थे। वे किसी से व्यर्थ में नहीं उलझते थे । वे एक मितभाषी व्यक्ति थे लेखक और उसकी माँ भी उनके इस स्वभाव से परिचित थे । इस कारण वे उन्हें उनकी दुनिया में आराम से रहने देते थे । 

वे एक प्रतिष्ठित व्यक्ति थे । उन्हें कई लोग बड़ी अच्छी तरह जानते थे और उनका सम्मान करते थे । 

लेखक के पिताजी एक बहुत ही संवदेनशील व्यक्ति थे । इसीलिए उन्होंने अपनी प्यास को दबाया लेकिन किसी से पानी नहीं माँगा । 

कहानी के अंत में वे एक ऐसी त्रासदी के शिकार हुए थे जिसकी कल्पना उन्होंने स्वप्न में भी नहीं की थी ।


प्रश्न 2. तिरिछ क्या है? कहानी में यह किसका प्रतीक है? 

उत्तर- ‘तिरिछ’ छिपकली प्रजाति का जहरीला जीव है जिसे ‘विषखापर’ भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इसके काटने पर व्यक्ति का जीवित बच पाना बहुत मुश्किल होता है। कहानी में ‘तिरिछ’ प्रचलित विश्वासों और रूढ़ियों का प्रतीक है।


प्रश्न 3. ‘अगर तिरिछ को देखो तो उससे कभी आँख मत मिलाओ । आँख मिलते ही वह आदमी की गंध पहचान लेता है और फिर पीछे लग जाता है। फिर तो आदमी चाहे पूरी पृथ्वी का चक्कर लगा ले, तिरिछ पीछे-पीछे आता है।’ क्या यहाँ तिरिछ केवल जानवर भर है? यदि नहीं तो उससे आँख क्यों नहीं मिलानी चाहिए? 

उत्तर – यहाँ तिरिछ केवल जानवर भर नहीं है बल्कि एक प्रतीक के रूप में सामने आया है उसे मृत्यु के प्रतीक के रूप में दर्शाया गया है, जो जब आती है तो व्यक्ति को लेकर ही जाती है । यहाँ आँख मिलाने का अर्थ- है घमंड करना। हमें कभी भी किसी चीज़ का घमंड नहीं करना चाहिए क्योंकि मृत्यु के सामने सब धरा रह जाता है। मृत्यु को कोई टाल नहीं सकता है, यह अश्यंभावी है 


प्रश्न 4. ‘तिरिछ’ लेखक के सपने में आता था और वह इतनी परिचित आँखों से देखता था कि लेखक अपने आपको रोक नहीं पाता था । यहाँ परिचित आँखों से क्या आशय है? 

उत्तर- तिरिछ लेखक के सपने में आता था । लेखक उसे सपने में इतनी बार देख चुका था कि वह उसे परिचित सा लगने लगा था । लेखक को उसकी आँखों में परिचय की चमक नजर आती थी। उसे लगता था कि वह उसका सबसे बड़ा शत्रु है और उसे लेखक के दिमाग में आनेवाले हर विचार के बारे में पता है । वह आँखों से तिरिछ के मनोभावों को जान लेता था ।


प्रश्न 5. व्याख्या करें- 

(क) वैसे, धीरे-धीरे मैंने अनुभवों से यह जान लिया था कि आवाज ही ऐसे मौके पर मेरा सबसे बड़ा अस्त्र है 1 

(ख) जैसे जब मेरी फीस की बात आई थी, उस समय हमारे पास का आखिरी गिलास भी गुम हो गया था और सब लोग लोटे में पानी पीते थे । 

(ग) आश्चर्य था कि इतने लंबे अर्से से उसके अड्डे को इतनी अच्छी तरह से जानने के बावजूद कभी दिन में आकर मैंने उसे मारने की कोई कोशिश नहीं की थी । 

(घ) मुझे यह सोचकर एक अजीब सी राहत मिलती है और मेरी फँसती हुई साँसें फिर से ठीक हो जाती हैं कि उस समय पिताजी को कोई दर्द महसूस नहीं होता रहा होगा । 

उत्तर- (क) लेखक जब भी कोई डरावना सपना देखता था तो वह डर के मारे चीखने लगता था । परन्तु उसकी आवाज बिलकुल अंतिम समय में निकल पाती थी । किन्तु वह जान चुका था कि किसी डरावने सपने से निकलने में आवाज ही उसकी मदद कर सकती है। वही उसका सबसे बड़ा अस्त्र होगी जिससे वह उस डर से बच सकेगा I 

(ख) लेखक के घर में काफी आर्थिक तंगी रहती थी। एक बार घर में उसकी फीस तक भरने के पैसे नहीं थे। उस समय उनके घर में एक गिलास तक नहीं बचा था और वे सभी एक लोटे में पानी पीते थे। घर में प्रतिदिन इस्तेमाल होने वाली छोटी-छोटी चीजों का भी अभाव रहता था । 

(ग) लेखक तिरिछ को ढूँढते हुए उस स्थान पर पहुँता है जहाँ वह मरा पड़ा था। उस जगह को देखकर लेखक को याद आता है कि यह वही जगह है जिसे वह अपने सपने में देखा करता था । उसे इस बात पर आश्चर्य हो रहा था कि वह इस जगह को इतनी अच्छी तरह जानता था, फिर भी उसने तिरिछ को पहले मारने का प्रयास क्यों नहीं किया । 

(घ) लेखक सोचता है कि उसके पिताजी के साथ जो घटना घटी है उसे वह एक सपना समझ रहे होंगे। वह यह सोचकर काफी राहत महसूस करता है। वह सोचता है कि उस समय पिताजी को उन चोटों के दर्द का कोई अहसास नहीं हो रहा होगा । क्योंकि वे तो उसे स्वप्न ही समझ रहे होंगे।


प्रश्न 6. तिरिछ को जलाने गए लेखक को पूरा जंगल परिचित लगता है । क्यों? 

उत्तर – लेखक बचपन से ही तिरिछ को सपने में देखता आया है। उससे बचने के लिए वह एक जंगल से भागा करता था । जब वह तिरिछ को जलाने के लिए जंगल में जाता है तो उसे पूरा जंगल परिचित लगता है क्योंकि वह इस जगह से कई बार सपने में तिरिछ से बचने के लिए भागा था । लेखक गौर से हर तरफ देखता है तो उसे वही सारी चीजें दिखाई देती हैं जो वह अपने सपने में देखता था, जैसे एक सँकरा-सा नाला, उसके ऊपर बड़ी-बड़ी चट्टानें हैं, कीकर का एक पुराना पेड़ जिस पर शहद के बड़े छत्ते हैं तथा एक भूरे रंग की चट्टान जो बरसात में नाले के पानी में आधी डूबी रहती थी । लेखक को उसी जगह तिरिछ की लाश भी मिल जाती है। सपने में आयी बातों के सच होने से लेखक को वह जंगल परिचित लगता है ।


प्रश्न 7. ‘इस घटना का संबंध पिताजी से है, मेरे सपने से है और शहर से भी है। शहर के प्रति जो एक जन्मजात भय होता है, उससे भी है।’ यह भय क्यों है? 

उत्तर – लेखक के पिता अंतर्मुखी तथा ग्रामीण मान्यता वाले आदमी हैं। वे शहर जाने से कतराते हैं। इस भय का कारण शहर की संवेदनहीनता है। शहर में उनके साथ जो अमानवीय व्यवहार हुआ उससे शहरी अमानवीयता साफ झलकती है। शहर में हर व्यक्ति अपने स्वार्थ से ओत-प्रोत है। नयी पीढ़ी अराजक एवं हिंसक होती जा रही है। शहर की आत्मीयता सिमट गयी है। आधुनिकता की यह विडम्बना शहर के भयावह रूप को रेखांकित करती है ।


प्रश्न 8. कहानी में वर्णित ‘शहर’ के चरित्र से आप कितना सहमत हैं? 

उत्तर – कहानी में वर्णित ‘शहर’ के चरित्र से मैं पूरी तरह सहमत नहीं हूँ । हालांकि इस सत्य को भी नकारा नहीं जा सकता कि आज शहरों की स्थिति कुछ हद तक खराब हो गई है । परन्तु स्थिति इतनी भी नहीं बिगड़ी है कि लोग एक असहाय व वृद्ध इंसान की ऐसी हालत कर दें । यह सही है कि शहरों में लोगों के पास समय का अभाव है तथा वे अपने में ही सीमित रहते हैं, किन्तु मानवीयतां अभी पूरी तरह मरी नहीं है । इस कहानी में वर्णित घटनाक्रम मुझे पूरी तरह सत्य प्रतीत नहीं होता है।


प्रश्न 9. लेखक के पिता के साथ दिक्कत यह भी थी कि वे गाँव या जंगल की पगडंडियाँ तो उन्हें याद रहती थीं शहरों की सड़कों को भूल जाते थे । इसके पीछे क्या कारण हो सकता है? आप क्या सोचते हैं? लिखें । 

उत्तर-उपयुक्त उदाहरण से स्पष्ट होता है कि पुरानी पीढ़ी विशेष रूप से गाँव में रहनेवाले लोग शहरी वातावरण में स्वयं को जल्दी नहीं ढाल पाते हैं। गाँव की यह पीढ़ी शहरों की आधुनिकता से आक्रान्त भी है। मनुष्य आत्मकेन्द्रित हो गया है तथा एक ग्रामीण संवेदना वाला व्यक्ति शहर में स्वयं को हर तरह से असुरक्षित पाता है जो स्वभाविक ही है । तिरिछ में लेखक के पिता अपने स्वभाव के कारण दयनीय बन जाते हैं तथा अपनी रक्षा तक नहीं कर पाते ।


प्रश्न 10. स्टेट बैंक के कैशियर अग्निहोत्री, नेपाली चौकीदार थापा, असिस्टेंट ब्रांच मैनेजर मेहता, थाने के एस.एच.ओ. राघवेन्द्र प्रताप सिंह का परिचय अपने शब्दों में दें। 

उत्तर – कैशियर अग्निहोत्री – कैशियर अग्निहोत्री, शहर में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में कैशियर थे। वह एक डरपोक आदमी है। बैंकों में आए दिन होने वाली डकैतियों के कारण वह बैंक में आनेवाले हर व्यक्ति पर संदेह करता है । जब लेखक का पिता कैशियर अग्निहोत्री के पास जाता है तो वह डर जाता है और चीखने लगता है । 

नेपाली चौकीदार थापा – थापा एक क्रूर स्वभाव का आदमी है। लेखक के पिता को बिना सोचे-समझे पीटना उसकी मानसिक कमजोरी का द्योतक है । अपने काम के प्रति सजग रहने का अर्थ यह नहीं है कि बिना सोचे समझे अधिकारियों के कहने पर किसी । दूसरे की जान तक ले लें । 

मैनेजर मेहता – मेहता स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में असिस्टेंट मैनेजर था । वह थोड़ी सूझ-बूझ वाला व्यक्ति है। जब लेखक के पिता को पीटा जा रहा था तब उसने ही कहा कि इसकी तलाशी लेकर इसे बाहर निकाल दो। 

एस. एच. ओ. राघवेन्द्र प्रताप सिंह – राघवेन्द्र प्रताप सिंह शहर के थाने में एस. एच. ओ. थे । उसके पसंदीदा भोजन से यह लगता है कि वह खाने पीने में काफी नखरे करता है । उसकी पत्नी को 13 साल उसके साथ रहने के बावजूद उसकी पसंद का पता नहीं चला था। साथ ही वह अपनी जिम्मेदारी भी ठीक से नहीं निभाता तथा लेखक के पिता की बात सुने बगैर ही उन्हें बाहर निकलवा देता है ।


प्रश्न 11. लेखक के पिता अपना परिचय हमेशा ‘राम स्वारथ प्रसाद एक्स स्कूल हेडमास्टर … एंड विलेज हेड ऑफ बकेली’ रूप में देते थे, ऐसा क्यों, और गाँव के बिना वे अपना परिचय क्यों नहीं देते? 

उत्तर-लेखक के पिता एक सभ्य व्यक्ति थे । वे अपना पूर्ण परिचय देना पसंद करते थे। अपने सीधे-सादे व्यक्तित्व के कारण स्कूल और गाँव के बिना वे अपना परिचय नहीं देते थे । इसके अतिरिक्त वे शहरी वातावरण में स्वयं को असुरक्षित पाते थे । उन्हें । लगता था कि शहर में अपने अस्तित्व एवं पहचान को बनाए रखने के लिए अपने पद तथा अपनी पृष्ठभूमि का परिचय देना आवश्यक है।


प्रश्न 12. ‘ हालाँकि थानू कहता है कि अब तो यह तय हो गया कि तिरिछ के जहर से कोई नहीं बच सकता। ठीक चौबीस घंटे बाद उसने अपना करिश्मा दिखाया और पिताजी की मृत्यु हुई।’ इस अवतरण का अभिप्राय स्पष्ट करें । 

उत्तर – गाँव के लोगों में तिरिछ के जहर से होने वाली मृत्यु के प्रति काफी अंधविश्वास था । लेखक के पिता की मृत्यु धतूरे का काढ़ा पीने, शहर में दर-दर की ठोकरें खाने तथा बहुत अधिक चोटें लगने के कारण हुई थी। लेकिन लोगों का मानना था कि उनकी मृत्यु तिरिछ के काटने से हुई जो कि एक अंधविश्वास ही था। थानू का कथन इसी अंधविश्वास की पुष्टि करता है ।


प्रश्न 13. लेखक को अब तिरिछ का सपना नहीं आता, क्यों ? 

उत्तर – लेखक को अब तिरिछ का सपना नहीं आने का कारण लेखक का सपना सत्य प्रतीत होना था । पहले लेखक को सपने में तिरिछ दिखता था और वह काफी डर जाता था । परन्तु अब उसने सपने वाली घटनाएँ वास्तव में घटित होती देख ली थीं। अब वह अपने अनुभव से यह जान गया कि सपना बस सपना भर है 

अब लेखक का भ्रम टूट गया है और उसे डर नहीं लगता तथा तिरिछ के सपने नहीं आते।


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